सरदार करारासिंह और मेरी मम्मी रानी का करार

हि, मैं लोलिता हूँ। मेरी मॉम कोंकणा सेन ‘कन्या स्कूल’ में शरीर शिक्षा व डांस की टीचर है। मम्मी प्रगतिशील विचारों की है इसलिए मैं भी आज़ादी से घूमती-डोलती हूँ।फिर भी हम दोनों सुबह का नाश्ता, लंच व डिनर साथ-साथ करते हैं। वो दिन 4 बजे से रात 12 बजे तक बिजी ही रहती है,क्योंकि वो प्राइवेट प्रैक्टिस करती है– उनका शहर से दूर एकांत स्थान में निजी फ़ार्महाउस है जहां वह लड़के-लड़कियों दोनों को मिलाजुला कर एक ग्रुप को व्यायाम-उछलकूद की मेहनत कराती है और दूसरे ग्रुप को आधुनिक अच्छे-अच्छे पर उत्तेजक डांस में टिकाती है।रात 7 बजे डिनर पर मेरी उनसे मुलाक़ात होती है, 8 बजे से रात 12 तक वह शहर के केन्द्रीय स्थान ‘अनारकली मनोरंजन ज़ोन’ में अपनी नवस्थापित ‘जलेबीबाई डांस-ड्रामा कंपनी’के स्टेज शो करती है।रात को अक्सर मैं यहाँ रहती हूँ और जिस रात यहाँ हुई उस रात मेरा भी एक डांस जरूर होता है।यह जरूरी नहीं कि मैं हर रात यहाँ होऊं ही क्योंकि मॉम की सिखाई आज़ादी का यही तो मतलब है कि रात हो तो भी मनमर्जी से जहां चाहो वहां डोलो।फिर भी मैं स्कूल नियमित जाती हूँ;मॉम तो सुबह 10 बजे के बाद चली जाती है पर मैं दोपहर 12:30 तक कन्या विद्यालय में डटी रहती हूँ।

क्या सोचा?अगले दिन धौंकलसिंह राजपूत कोई 11 बजे स्कूल में आए।प्रिन्सिपल बेलारानी भोसले का संदेश पा मैं भी पहुंची।धौंकल जी के साथ उनकी छोटी बहन थी। उसका नाम मालती था, उम्र 23; इतने में धौंकल जी की अपनी लड़की भी आ गयी जो इसी स्कूल में पढ़ रही थी व मेरे से एक साल छोटी थी। उसका नाम नीना था, प्यार में पालतू नाम,’निन्नी’।धौंकल ने मेरी ओर इशारा कर बेला भोसले से कर पूछा: ‘बच्ची को ले जाऊं?’ वो मुस्कराते हुए बोली:’ येस,ले जाइए; आपका ही माल है!’

धौंकल जी ने मुझे, बहन मालती और अपनी बेटी निन्नी को अपनी फर्राटा कार में लादा; मैं अगली सीट पर और बाकी दो पिछली सीट पर । बोले: ‘पहले कहीं चलकर कुछ मजेदार खाते हैं। उनकी कार एक रंगबिरंगे होटल पर रुकी।उसमें कई रेस्तरां,बार,यहाँ तक कि एक नाचघर भी था। वहाँ भी खाने-पीने की चीजें सर्व होतीं।नाचघर में तीन गुजराती लड़कियों का समूह में नृत्य चल रहा था: तीनों एकदम सफ़ेद झक्क लहंगा-चोली में थीं व भीतर ब्रा-पेंटी कुच्छ भी न था, जिसके कारण उनके मादक अंग हलके-हलके नग्न निहारे जा सकते थे।हमने बेगमी पूड़ी और बादाम-पिश्ते का हलवा मंगाया; वह चट कर लेने पर एक शर्बत का जाम, शायद नशीला।धौंकल सर आज हाफ पेंट ( निकर ) में थे,उन्होने आधा जाम पीने पर निन्नी को अपनी गोद में लगाया व अपनी एक टांग उसकी नन्ही टांग से भिड़ा दी।अपना जूठा जाम निन्नी को पिलाया व उसका जूठा खुद गटका।मालती जीन्स में थी व मैं स्कर्ट में, फिर मालती ने भी मुझे अपनी गोद चढ़ा जाम मेरे पेट में ठरकाया।

हम फिर फर्राटा गाड़ी में सवार हुए।अबकी बार स्टिअरिंग पर मालती थी,उसके साथ निन्नी।सर व मैं पीछे की सीट पर।जैसे ही गाड़ी दौड़ी, सर ने अपनी एक टांग मेरी दोनों टांगों के बीच फंसा दी, व वे मेरी नाभि-कुंडली से खिलवाड़ करने लगे,मुझसे बोले: ” देखो बेटा,हम अब चल रहें है सीधा सरदार करारासिंह शिरोमणि सिख साहब के पास;वो यूं कि जिस लाइन में तुम्हें व निन्नी बिटिया को उतारना है उसमें वो माहिर, एक्सपर्ट हैं, समझी?’फिर बोले: ‘वो 52 साल के हैं पर वाह, क्या जोश, क्या जवानी और हुनर है उनके पास!!लड़कियों का कायाकल्प कर देते हैं!’

थोड़ी ही देर में सरदार जी का मकान आ गया,मकान के पास खुला अखाडा था जहां कम उम्र के पहलवान बदन पर सिर्फ और सिर्फ लाल लंगोटी पहन आपस में कुश्ती -पटक कर रहे थे।पास में ठंडाई की दूकान भी थी और दूध-मलाई-बादाम की भी।मकान तीन मंजिल का था, हम तीसरी मंजिल पहुंचे। एक बड़ा सा हॉल था और सारा सुनसान।सरदार जी कडक, कद्दावर व मोटे भरे हुए जिस्म के थे, उनकी जांघों की मछलियाँ फड़फड़ा रही थीं, चमकती हुई आँखें, व बुर्राक घनी दाढ़ी-मूँछें, सिर पर पवित्र पगड़ी।धौंकल जी ने परिचय कराया: ‘ मालती को तो आप जानते ही हैं,उसके साथ ये दो और हैं, एक तो मेरी अपनी बच्ची निन्नी और दूसरी ये, लोलिता; देखिये, बुरा न मानें दोनों की शक्ल-सूरत व कद-काठी वैसी है जैसे 14-की उम्र में खड़ी खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा !!दोनों ताज़ा माल हैं। आप किरपा करें।’मेरी व निन्नी की शक्ल मिलतीजुलती थी इसलिए सरदार साहब ने पूछा, इनमें तुम्हारी छोकरी कौन है?धौंकल सर ने निन्नी को सरदार जी की ओर भेजा, बोले’ चल गुरू की पग-परिक्रमा कर!’ सरदार करारासिंह ने मुझे तेज नज़र से देखा,फिर निन्नी की ओर आँख गड़ायी; मेरी ओर इशारा दिखा बोले–‘ धौंकल,माल तो ताज़ा और चोखा है मगर तुम जानते हो मैं पूरी परख करता हूँ,इसके मां-बाप, भाई-बहन कौन-कौन हैं ,है कोई ज़िम्मेदारी लेनेवाला?’धौंकल बोला: ‘यार, मुझ पर बिस्वास कर, बाप तो इसका कोई है नहीं, समझ कि मैं ही इसका बाप हूँ,और न इसके कोई भाई-बहन है,एक माँ है, स्कूल टीचर, नाचने-गाने की कंपनी खोल रखी है और इसे आज़ादी दे रखी है,तुसी फिकर ना करो जी!’सरदार बोला, ‘ नई चिड़िया है, कल अध-बीच फुर्र हो जाए, तो?… नहीं,हां, तूने कहा नाचने-गाने की कंपनी चलाती है तो कौनसी व कहाँ? धौंकलसिंह राजपूत ने कहा– ‘ इसकी मॉम ‘अनारकली मनोरंजन ज़ोन’ में ‘जलेबीबाई डांस-ड्रामा कंपनी ‘ चलाती है, और सुना है कि कुछ ‘ऐसी-वैसी’ भी है।’सरदार जी खुश होते हुये बोले:’ हां, जलेबीबाई कंपनी, नयी-नयी खुली है,लग गया पता, लोग चटकारा डांस देखने वहाँ जाते हैं;वो तो बड़ी सेक्सी बुलबुल है, ‘ फिर कुछ याद करते बोला–‘ हां, शायद उसका नाम कोंकणा है, वो तो यार एक सेठ से लगी हुई है, उसको तो मैं पटा लूँगा इस चिड़िया को नंगी फिल्म में उतारने।’

सरदार कुछ ठहर कर फिर बोला–‘ आज ही इसकी मॉम के पास चलेंगे, इसकी मां ठगनचंद सेठ से लगी हुई है, वो इसे पैसे देता है; ठगन को मैं अभी फोन कर लेता हूँ, उसे ले चलेंगे साथ, तुम भी रहना।तभी मैंने चिल्लाकर कहा, ‘जो करना है जल्दी करो,अभी मुझे मॉम के साथ लंच करना है।’तय हुआ कि मालती मुझे मॉम के पास छोड़ आएगी , और लंच के बाद ठगनचंद, धौंकल और करारासिंह मेरे नंगे उदघाटन के लिए मॉम को पटाने निकलेंगे।

मॉम आज पता नहीं क्यों, छम्मकछल्लो बन कर बैठी हुई थी।भोजन आनंदपूर्वक हुआ।भोजन के बाद मैं व मॉम एक ही बिस्तर पर विश्राम को लेट गए।आधे घंटे बाद सेठ ठगनचंद का फोन आया,मॉम के लिए; सेठ ने कहा: ‘एक बिज़नस डीलिंग के लिए मैं एक दोस्त के साथ तुम्हारे यहाँ पहुँच रहा हूँ।तेरी बेटी को भी तैयार रखना,जरूरी है; हम पहुँच रहे।’ मॉम ने कहा: ‘ओ के , थैंक्स ‘।

मैं न तो ठगनचंद को जानती थी, न पहचानती । मैंने तो उसका नाम करारासिंह के मुंह से आज ही सुना था।कोई सवा दो बजे एक बड़ी चमचमाती गाड़ी दरवाजे पर आई, उसमें से तीन आदमी उतरे, एक करारासिंह और दो और। एक ने सफ़ेद धोती-कुर्ता व हाथ में व गले में सोने के मोटे-मोटे कड़े व चेन पहन रखी थी,उसका पेट मोटा व जांघे भारी थी, चलने में रुआब था, मैंने अंदाज़ा लगाया यह सेठ होगा,दूसरा गोराचिट्टा फिल्मी – एक्टर जैसा कोई था। बाद में पता चला उसका नाम मनोहरलाल था, वो एक विज्ञापन कंपनी चलाता था, उम्र 33 की थी जबकि सेठ 62 साल का।सेठ ने मॉम का परिचय कराया और उससे कहा: ‘ ये लोग कला जगत से हैं,मनोहरलाल विज्ञापन कला में माहिर है और करारासिंह जी फिल्म कला में।मनोहर सेनीटरी नेपकिन और बदन स्वच्छता के विज्ञापन टेलीविज़न पर उतारते हैं,मुझसे बोले कोई ताज़ा लड़की बताओ तो मेरे दिमाग में तुम्हारी बच्ची का खयाल आया।’ मॉम बोली, ‘मुझे तो कोई ऐतराज नहीं पर क्या गुड़िया यह सब कर पाएगी?’ मनोहर बोला: ‘बहिन जी, ये सब हम पर छोड़ दीजिये, क्यों नहीं कर पाएगी, आजकल इससे भी छोटी लड़कियां विज्ञापन में आ रही हैं’।मॉम ने सरदार जी के बारे में पूछा। सेठ ने कहा: ‘ये ऊंचे निर्माता-निर्देशक है। मुंबई में इनके कई फिल्म स्टुडियो हैं,धार्मिक फिल्म’राधा रसवंती’ इन्होंने ही बनाई है पर अब ये दूसरी तरह की फिल्में बनाते हैं।दोनों तरह की फिल्मों में चुनौती और रिस्क है पर इनकी फिल्मों में काम करेगी तो तुम्हारी बच्ची चमक जाएगी,हालांकि सरदार करारासिंह जी की फिल्मे कुछ ऐसी वैसी होंगी!लेकिन ये मेरे पुराने दोस्त हैं और इन्हें मैं कुछ सोच कर ही लाया हूँ।’मॉम बोली, ‘देखिये, ‘ऐसी-वैसी’-दृश्य वाली फिल्मों से मैं डरती नहीं हूँ, और मेरी कंपनी में उत्तेजक नाच तो गुड़िया ने किए भी हैं, और मैं भी इसी लाइन में हूँ और देर-सबेर ये पूरा खुल्ला वयस्क नग्न नृत्य भी करेगी, मैं करवाऊँगी; सवाल ये है कि फिल्म का डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम क्या है,फिल्म विदेशों में जाएगी या नहीं, पैसा कितना मिलेगा, टेक्नालजी आधुनिक होगी या नहीं?’ मुझे नंगी फिल्मों से परहेज नहीं है लेकिन पहले मेरे सामने सारा मामला शुद्ध-साफ हो जाना चाहिए’।

इस पर सरदार करारासिंह की आँखों में अद्भुत चमक आ गयी,वो बोले: ”सत्त वचन कोंकणा रानी, मैं नंगी फिल्में ही बनाता हूँ।आपकी लोलिता पर मेरी पूरी-पक्की गंदी नज़र है,देखो बुलबुल, शूटिंग स्विट्ज़रलैंड , ब्राज़ील के जंगल, टोक्यो व ओसाका के होटल, न्यू यॉर्क -शिकागो जैसे बड़े शहरों मे होगी,सेट व स्टूडिओ एक से बढ़कर एक आलीशान,खाने-पीने और शराब का माकूल इंतजाम, बिटिया को कीमती से कीमती ड्रेस में नंगी चुदवाऊँगा !’
” ठीक है, ठीक है! मगर करारा जी बच्ची को एक सीन के कितने मिलेंगे ? और एक बात और, इंटरनेट पर फिल्म फ्री नहीं दिखाई जाएगी।’ सरदार जी ने कहा: ‘इंटरनेट पर तो हम फिल्म डालेंगे ही नहीं, न ही डीवीडी बनेगी। फिल्म पैसा लेकर खास-खास औडिटोरियम्स या स्टुडियो में ही दिखायेंगे ,वह भी खास भरोसेमंद रईसों को ।’
‘ ठीक है, एक सीन के कितने मिलेंगे ?’
”वही, जो इंटरनेशनल रेट है ”
‘ क्या रेट है ?’
” एक सीन, तीन घंटे का — 67 हज़ार रुपये मिलेंगे। ”
‘ मैं लीगल एग्रीमेंट करूंगी’
” तब महीने में तुम्हारी बेटी को 5 सीन करने होंगे’
‘ ठीक है; मगर मैं 3 लाख रुपये एडवांस लूँगी ‘
खींचतान कर तय हुआ कि 3 लाख रुपये सिक्युअर्टी मनी की तरह हमेशा कोंकणा जी के बेंक अकाउंट में रहेंगे, हर सीन पूरा करने पर बेटी को 67 हज़ार नकद मिलेंगे; 5 से ज्यादा सीन करने पर अलग से अनुबंध करना होगा।
मोहनलाल के लिए सेनेटरी व कोंडोम के विज्ञापन के लिए कोंकणा दूसरी लड़की का इंतजाम करेगी।

सेठ जी ने करारासिंह की ओर से नकद डेढ़ लाख रुपये तो उसी वक्त मॉम की झोली में डाल दिये, बाकी करार होने पर करारासिंह देगा।उस दिन न तो मॉम फ़ार्महाउस गयी, न ही डांस कंपनी। सहायकों को फोन कर दिया। देर रात लोगों का आना-जाना लगा रहा। धौंकलसिंह भी आ गए। वकील आए, गुमाश्ते आए, नोटेरी हुई, क़रारनामा हुआ, गवाह आए।खाने-पीने दारू का ज़ोर चला। दूसरे सब लोग चले गए, पर धौंकलसिंह व करारासिंह रुके रहे। फिर वे जाने को उठे तो मॉम ने करारासिंह को कहा, आप आज रात यहीं रुक जाइए।सरदार जी ने कहा , ‘नहीं, धौंकल राठौड़ मेरा लंगोटिया दोस्त है, मैं अकेला तो रुक नहीं सकता। ‘ मॉम बोली, ‘तो दोनों रुक जाओ, मना किसने किया है।’

उस रात करारासिंह व धौंकलसिंह दोनों ने मॉम को आगे-पीछे लग साथ-साथ चोदा।

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